मेरे पास लाइफ में करने को बहुत कुछ, ट्रोलर्स के पीछे समय बर्बाद नहीं करती

तापसी पन्नू इन दिनों अपनी फिल्म थप्पड़’ और ‘शाबाश मिथु’ को लेकर चर्चा में हैं। इनके अलावा भी उनके पास ‘रश्मि रॉकेट’ जैसी एक और स्पोर्ट फिल्म है। इस खास मुलाकात में तापसी ने फिल्मों और अपने किरदारों की तैयारी को लेकर की खास बातचीत…

‘थ प्पड़’ का कॉन्सेप्ट कैसे आया?
‘मुल्क’ के प्रमोशन के दौरान एक बार प्लेन में मैं और अनुभव सिन्हा सर साथ में बैठे थे और यह प्लान कर रहे थे कि अब आगे क्या करना है। उस समय मैंने उनसे बोला था कि मेरे जेहन में एक कॉन्सेप्ट है। वह मेरे दिल के बहुत करीब है। मैंने उनसे कहा कि किसी दिन अगर मेरी इतनी हैसियत हो कि मैं कोई मुद्दा चूज करूं और उस पर फिल्म बने तो मैं जरूर उसे बनाना चाहूंगी और उसमें काम करना चाहूंगी। मेरा तो पहले से ही तय था कि मैं ‘थप्पड़’ जैसी कोई फिल्म करूंगी। खुशनसीब हूं कि हीरोइन होकर मैं एक आईडिया शेयर करती हूं और अनुभव सिन्हा जैसे डायरेक्टर उस पर पूरी कहानी तैयार कर सामने आते हैं। बतौर कलाकार यह मेरे लिए बड़ी हाइक है।


एक जो डर का भाव होता है एक्टर्स और मेकर्स के लिए फिल्मों को लेकर वह क्यों खत्म हुआ?
जब से मुझे समझ में आया है कि फिल्म इंडस्ट्री का रूट क्या है मुझे किस तरह की फिल्में करनी है तब से मैं फीयरलेस ही हूं। उससे पहले मुझे कुछ ज्यादा पता नहीं था। न मुझे एक्टिंग आती थी, न डिसीजन मेकिंग थी कि कैसी फिल्में चीज करनी हैं। हिंदी फिल्मों में आने से पहले ही मैंने कई गलतियां कर ली थीं। मुझे गलतियां रिपीट करने की आदत नहीं, इसलिए बॉलीवुड में मैंने इस बात का बेहद ध्यान रखा। एक बार मुझे अपनी डायरेक्शन पता चल गई तो अब मुझे कोई डर नहीं।
निशानेबाजी के बाद अब आप बैटिंग करने के लिए तैयार हैं। क्या कहेंगी?
जी हां, पहले निशानेबाजी फिर बैटिंग और उसके बाद दौड़ने के लिए भी तैयार ‘रश्मि रॉकेट’ में मैं एक रनर का रोल प्ले कर रही हूं। मेरा शेड्यूल काफी स्पोर्टी होने वाला है। इसके बाद मिस्ट्री थ्रिलर ‘हसीन दिलरूबा’ की भी तैयारी चल रही है।


सोशल मीडिया पर जिस तरह ट्रोलिंग की जाती है। विवाद होते हैं उसे लेकर क्या कहेंगी?
एक होता है प्योर क्रिटिसिज्म और एक होता किसी से जवाब मांगने वाला क्रिटिसिज्म। जिसमें आप चाहते हो कि सामने वाला बंदा कुछ बोले। मेरा सिंपल लॉजिक है कि मेरे पास इसके लिए टाइम नहीं है। मेरे पास लाइफ में करने को बहुत कुछ है। सोशल मीडिया पर समय बर्बाद करने का मेरे पास टाइम नहीं है।
आपके पास और कौन सी स्क्रिप्ट आ रही हैं, जिन्हें फाइनल कर रही हैं?


अच्छी स्क्रिप्ट को लेकर मैं बहुत लालची हूं। उसे अपने हाथ से नहीं जाने देती। चाहे मुझे 6 फिल्में एक साथ करनी पड़े, लेकिन मैं किसी कीमत पर हाथ से अच्छी स्क्रिप्ट नहीं जाने देती। कह सकते हैं कि मैंने अपना रुमाल रख दिया है।

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